पती-पत्नी (०४/०७/२०१५)
पती-पत्नी हे एकाच नाण्याच्या दोन बाजू असतात
संसाराच्या गद्याची दोन चाके असतात.
दोन शरीर परंतु एक आत्मा
एक हास्य तर एक त्या हसण्याचे कारण असतात.
एक आधार तर एक उदार
एक हट्टी तर एक समजूतदार असतात.
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पती-पत्नी हे एकाच नाण्याच्या दोन बाजू असतात
संसाराच्या गद्याची दोन चाके असतात.
दोन शरीर परंतु एक आत्मा
एक हास्य तर एक त्या हसण्याचे कारण असतात.
एक आधार तर एक उदार
एक हट्टी तर एक समजूतदार असतात.
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